नवरूज़ की प्रार्थना (#14355)

हे ईश्वर! तेरी ही स्तुति हो, तूने नवरूज़ को उनके लिये एक उत्सव के रूप में दिया है जिन्होंने तेरे प्रेम के कारण उपवास धारण किया है और उस सबका परित्याग किया है जो तेरी दृष्टि में अमान्य है। हे मेरे ईश्वर! वरदान दे, कि तेरे प्रेम की अग्नि और तेरे द्वारा विहित उपवास से उत्पन्न ताप उन सबको तेरे धर्म में प्रदीप्त कर दे और तेरे स्मरण और यशगान में प्रवृत्त कर दे।
हे मेरे स्वामी! जब तूने ही उन्हें अपने द्वारा निर्धारित उपवास के आभूषण से अलंकृत किया है, उन्हें अपनी करुणा और उदार कृपा से, अपनी स्वीकृति का आभूषण प्रदान कर, क्योंकि मानव का प्रत्येक कर्म तेरे ही अनुग्रह पर निर्भर है, तेरी ही आज्ञा पर आश्रित है। यदि तू उपवास तोड़ने वाले को उपवास करने वाला घोषित कर दे, तो उसकी गणना अनन्तकाल से उपवास करने वालों में होगी; और यदि तेरे निर्णय में उपवास करने वाला उपवास तोड़ने वाला घोषित हो जाये, तो उसकी गणना उन लोगों में होगी जिन्होंने तेरे प्रकटीकरण के परिधान को अस्वच्छ कर दिया है और जो तेरे जीवन-निर्झर के स्फटिक जल से दूर कर भटक गये हैं।
तू वह है जिसके माध्यम से ’प्रशंसनीय है तू निज कार्यों में‘ की ध्वजा फहरायी गई है और ”अनुपालित है तू निज आदेश में“ की पताका फहराई गई है। हे मेरे ईश्वर! अपने सेवकों को तू अपने पद का ज्ञान करा, ताकि वे जान सकें कि प्रत्येक वस्तु की उत्तमता तेरी आज्ञा, तेरे पावन शब्द पर आश्रित है; प्रत्येक कर्म का गुण तेरी इच्छा और अनुकम्पा पर निर्भर है, ताकि वे जान सकें कि मानव के कर्म की बागडोर तेरी स्वीकृति और तेरी आज्ञा की पकड़ में है। उन्हें यह ज्ञान करा दे कि कुछ भी उन्हें तेरे सौन्दर्य से वंचित नहीं कर सकता। ईसामसीह के उद्गार हैं: ”हे दिव्य चेतना (ईसा) के महान जनक! समस्त साम्राज्य तेरा है।“ और इसी के लिये तेरे मित्र (मुहम्मद) ने आवाज लगाई: ”तेरी स्तुति हो, हे परम प्रियतम, कि तूने अपने महान सौन्दर्य के दर्शन कराये हैं और अपने प्रियजनों के लिये उसका विधान किया है, जो उन्हें तेरे सर्वमहान नाम के सिंहासन के निकट लायेगा, जिनके माध्यम से, उनके अतिरिक्त, जिन्होंने तेरे सिवा अन्य सभी कुछ से स्वयं को अनासक्त कर लिया है, अन्य लोगों ने विलाप किया है। जो अनासक्त हुए हैं वे उसकी ओर उन्मुख हुए हैं, जो तेरे अस्तित्व को साकार करता है, जो तेरे गुणों का अवतार है।“
हे मेरे ईश्वर, वह जो तेरी शाखा है उसने और तेरे समस्त मित्रों ने आज के दिवस में अपना उपवास समाप्त किया है, जिसे उन्होंने तेरी सुप्रसन्नता के लिये तेरे विधानों के अधीन धारण किया था। हे ईश्वर, उनके लिये और उन सबके लिये जिन्होंने उपवास के दिनों में तेरी निकटता पाई है, वह सब मंगल विधान कर जिसे तूने अपने परम महान पुस्तक में विहित किया है। तब उन्हें वह प्रदान कर जो उनके लिये इहलोक और परलोक में लाभदायक हो।
तू सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

